
नारनौल ( रजत राणा )
नारनौल जिले के गांव कांवी में आंगनबाड़ी केंद्र से गर्भवती महिला को दिए गए पोषाहार में कथित तौर पर फफूंदी लगे चने मिलने का मामला सामने आया है।
बताया गया कि महिला का आठवां महीना चल रहा है और वह हर महीने आंगनबाड़ी केंद्र से पोषाहार लेने जाती है। मंगलवार सुबह को पोषाहार घर ले जाने के बाद जब परिवार ने पैकेट खोला तो चनों में फफूंदी दिखाई देने का आरोप लगाया गया।
पोषाहार में चावल, चॉकलेट, चने और खील दिए गए थे। परिवार ने खराब बताए जा रहे चनों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।
लेकिन कहानी में एक और सवाल है…
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गायत्री देवी का कहना है कि केंद्र पर अलग से चनों की सप्लाई नहीं हुई है। उनके अनुसार खील के अंदर मौजूद चनों का स्टॉक करीब तीन दिन पहले आया था और केंद्र पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर ही पोषाहार वितरित किया गया।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि चने खराब थे या नहीं…
अगर चनों में फफूंदी थी तो खराबी आखिर किस स्तर पर हुई?
सप्लाई के समय गुणवत्ता की जांच हुई थी या नहीं?
भंडारण के दौरान खाद्य सामग्री की स्थिति की निगरानी कौन करता है?
और सबसे बड़ा सवाल—गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले पोषाहार की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
फिलहाल परिवार का आरोप और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का पक्ष—दोनों सामने हैं। चने वास्तव में किस वजह से खराब हुए और जिम्मेदारी किसकी बनती है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्योंकि सवाल सिर्फ कुछ चनों का नहीं है…सवाल उस पोषाहार की गुणवत्ता का है, जो गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण के लिए दिया जाता है।






