
रजत राणा ( वायरल हरियाणा )
करनाल जिले के सबसे बड़े गांव सालवन में युधिष्ठिर राणा के बेटे हाईकोर्ट में एडवोकेट वीरेंद्र सिंह ने अपनी शादी में ऐसी मिशाल कायम की जिसका उदाहरण आने वाली पीढ़ियों को दिया जाएगा। एडवोकेट वीरेंद्र सिंह की शादी रिशु पुत्री राजेश पुंडीर निवासी मूसेल जिला सहारनपुर ( उत्तरप्रदेश ) से हुई। जिसमें शगुन के तौर पर सिर्फ 1 रुपया लिया गया। जिसकी न केवल हरियाणा बल्कि अन्य राज्यों में भी सरहाना की जा रही हैं।

भात में लिया 101 रुपया –
दूल्हे के पिता युधिष्ठिर सालवन ने बताया कि भात में उन्होंने शगुन के तौर पर सिर्फ 101 रुपया लिया, ना कोई कपड़ा लिया, ना कोई गहने लिए, ना कोई मिलाई करवाई। उन्होंने कहा कि हमें शादी के साथ साथ भात में भी सिर्फ दिखावे के लिए लाखों रूपये, गहने, कपड़े व मिलाई का त्याग करना चाहिए, जिसकी शुरुआत उन्होंने खुद के बेटे कि शादी से कि हैं।
पिता नहीं गांव के 11 मौजीज आदमी गए बारात में –
युधिष्ठिर सालवन ने बताया कि अगर हम सच में दहेज के बिना शादी करना चाहते हैं सबसे पहले हमें बारात लेकर जाना बंद करना पड़ेगा, बारात में सिर्फ 11 आदमी जाए। उन्होंने कहा मैं खुद अपने बेटे कि शादी में नहीं गया बल्कि गांव के 11 मौजीज आदमी बारात में गए, मुझे अपने बेटे एडवोकेट वीरेंद्र सिंह पर भी गर्व हैं जिसने इन सबमे हमारा साथ दिया। युधिष्ठिर राणा ने कहा जो पिता अपनी बेटी देता हैं वो सब कुछ देता हैं इसलिए दुल्हन ही दहेज हैं।
शगुन में लिया 1 रुपया, ना सामान, ना गहने, ना कपड़े –
युधिष्ठिर सालवन ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे कि शादी में सिर्फ 1 रुपया शगुन के रूप में लिया, शादी में ना कोई गहने लिए गए, ना कोई फर्नीचर या अन्य सामान लिया गया, ना कपड़े लिए गए ओर ना ही बारात कि मिलाई ली गयी। हम सबको इसी तरह बड़ा दिल दिखाना चाहिए, बहुत सारी शादियों में लोग सिर्फ कैश में मिलने वाले रूपये लौटा कर बिना दहेज कि शादी का महिमा मंडन करने लगते हैं जबकि हमें शादी में मिलने वाले सामान, गहने, मिलाई व कपड़ों का भी त्याग करना जरूरी हैं। तभी वह सही मायनों में बिना दहेज के शादी मानी जाती हैं।

दूल्हा बोला सिर्फ एक जोड़ी कपड़े में आई मेरे सपनो कि राजकुमारी –
इस अवसर पर हाईकोर्ट में एडवोकेट दूल्हे वीरेंद्र सिंह ने कहा कि मुझे ये संस्कार अपने गांव के बुजुर्गों, अपने दादा, अपने पिता व परिवार से मिले हैं। हम हमेशा से चाहते थे कि शादी में कुछ नहीं लेना हैं मेरे लिए मेरी दुल्हन ही सब कुछ हैं। दूल्हे में कहा कि मेरी दुल्हन सिर्फ एक जोड़ी कपड़ों में आई हैं इसके आलावा हमने कुछ नहीं लिया। मेरे पिता युधिष्ठिर सालवन का भी ये ही सपना था एक ऐसी शादी करनी हैं जो सच में दहेज रहित हो। दूल्हे ने कहा सभी युवाओं को आगे आना चाहिए व इसी तरह बिना दहेज कि शादी करनी चाहिए। वहीं दुल्हन रिशु का कहना हैं कि वह बहुत भाग्यशाली हैं जो उसे ऐसा परिवार मिला हैं अगर सभी ऐसे ही शादी करने लगे तो बेटियां किसी पिता पर बोझ नहीं रहेगी।

